बारिश के मौसम में नवजात शिशु की देखभाल: बदलाव लाये बच्चे के जीवन में कमाल
बारिश के मौसम का आना नवजात शिशु के लिए एक रोमांचक और आनंददायक समय हो सकता है, लेकिन यह भी कुछ स्वास्थ्य सुरक्षा के खतरों को लेकर आता है। इसलिए, अगर आप एक अभिभावक हैं,
तो आपको बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए। इस लेख में, हम आपको बारिश के मौसम में बच्चों की देखभाल baby care in rainy season के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स प्रदान करेंगे।
स्वच्छता और हाइजीन का ध्यान रखें
बारिश के मौसम में नवजात शिशु की देखभाल और स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण होती है। उन्हें नियमित रूप से हाथ धोने की आदत देनी चाहिए और अगर वे गंदे हो जाते हैं तो उन्हें तुरंत नहाना चाहिए।
साथ ही, उनके बालों को सुखा रखने के लिए एक अच्छा टावल और बाल संरचना के लिए कंघी का उपयोग करें।
विशेष संरचनाओं की सुरक्षा
आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके घर और आस-पास के क्षेत्र में कोई खतरनाक विशेष संरचनाएं नहीं हैं जैसे कि गिरने के खतरे वाले पेड़, घर के सामान के टूटने का खतरा
, या अस्थिर गड़बड़ी वाले स्थान। यदि आप ऐसी संरचनाओं को पहचानते हैं, तो उन्हें ठीक करने के लिए तुरंत कार्रवाई करें या उनसे दूर रहें।
मौसमी बदलाव के लिए संतुलित आहार
बच्चों को अच्छा पोषण प्रदान करना बारिश के मौसम में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका आहार संतुलित हो रहा है और उन्हें पर्याप्त मात्रा में
पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं। उन्हें पूरे दिन भर में ही अदरक, नींबू, खीरा, और गर्म पानी का सेवन कराना चाहिए, जो उनकी पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करेंगे।
मौसमी रोगों से बचाव
बारिश के मौसम में नवजात शिशु को संक्रमणों से बचाने के लिए सावधान रहना चाहिए। उन्हें हाथों को नियमित रूप से धोना सिखाएं और उन्हें साफ पानी का सेवन कराएं। बच्चों को हैंडसेनिटाइज़र
का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें सामान को साफ रखने के लिए सिखाएं। इसके अलावा, उन्हें बाहर नहाने, गंदे पानी में नहाने, और गंदे स्थलों पर खेलने से रोकें।
विश्राम और नींद का महत्व
बच्चों को बारिशी मौसम में पूरी नींद और आराम देना बहुत महत्वपूर्ण है। यह उनकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है और संक्रमणों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। एक नियमित नींद
की अवधि सुनिश्चित करें और उन्हें रात्रि में अरामदायक बिस्तर प्रदान करें।
पानी का प्रबंधन
बच्चों को बारिशी मौसम में पानी के प्रबंधन के बारे में शिक्षा देना आवश्यक है। उन्हें सिखाएं कि वे उचित तरीके से विभिन्न स्रोतों से पानी पीने चाहिए और उन्हें प्राकृतिक संरचनाओं से दूर रहने के
लिए समझाएं। वाटरप्रूफ कॉट और छाता उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे।
स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण
बारिश के मौसम में नवजात शिशु की स्वास्थ्य जांच का विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्हें नियमित रूप से डॉक्टर के पास ले जाएं और उनके सभी टीकाकरण के अद्यतन को सुनिश्चित करें।

वर्षा के दौरान विश्राम करें
बारिश के मौसम में बच्चों को घर के अंदर समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें बारिश के दौरान खेलने और मनोरंजन करने के लिए तरीके दें, जैसे कि खुद को रंगीन छाता में घुसना,
घर में खेल खेलना, या किसी दिनभर के समय में स्वास्थ्यप्रद गतिविधियों में भाग लेना।
विमान यात्रा की सुरक्षा के बारे में जागरूकता
अगर आप बारिशी मौसम में विमान यात्रा कर रहे हैं, तो बच्चों को विमान यात्रा की सुरक्षा के बारे में जागरूक करें। उन्हें विमान में सीटबेल्ट पहनने, सभी सुरक्षा
नियमों का पालन करने, और विमान में घूमने के बाद हाथ धोने के लिए समय देने का महत्व समझाएं।
वातावरणिक औषधियों का सही उपयोग
यदि नवजात शिशु को बारिशी मौसम में आलर्जी या संक्रमण हो जाता है, तो आप उनके इलाज के लिए वातावरणिक औषधियों का सही उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए
आपको एक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए और दवाइयों का सटीक खुराक और उपयोग का ध्यान रखना चाहिए।
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मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करें
बारिश के मौसम में नवजात शिशु को मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करना बहुत महत्वपूर्ण है। आप घर पर खेल या कला से संबंधित गतिविधियाँ कर सकते हैं, जैसे कि
अद्यतन बनाने का काम, वर्णनात्मक कथा लेखन, पहेलियों और खेलों का आयोजन करना, या चित्रकला का मजा लेना।
घर की साफ-सफाई
बगीचों, बाथरूमों या आस-पास की बालकनियों सहित घर के विभिन्न क्षेत्रों पर नज़र डालें और पानी के गड्ढों, नमी और अंधेरे कोनों की जांच करें, क्योंकि वे मच्छरों और फंगल संक्रमण को जन्म दे सकते हैं। रुकावट और अतिप्रवाह से बचने के लिए अपनी सभी नालियों को साफ करें ।
बरसात के मौसम में बिजली दुर्घटनाएँ आम हैं, इसलिए अप्रयुक्त बिजली प्लग को ढक कर रखें और किसी भी ढीले बिजली के तार को सुरक्षित रखें जो लटक रहा हो।
स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए एक स्वस्थ आहार
जितनी बार संभव हो स्तनपान कराने का विकल्प चुनें क्योंकि यह आपके बच्चे को सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक एंटीबॉडी और विटामिन और खनिज जैसे पोषक तत्व प्रदान करता है।
आपको भी एक अच्छे आहार का पालन करना चाहिए, क्योंकि ये पोषक तत्व आपके बच्चे को अनिवार्य रूप से आपके दूध के माध्यम से मिलेंगे।
संक्रमण को खत्म करें
बुखार , शरीर में दर्द, छींक आना आदि सामान्य मानसून-प्रेरित बीमारियों के क्लासिक लक्षण हैं और यहां तक कि वायरल बीमारियों की शुरुआत का संकेत भी दे सकते हैं।
तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें और प्रारंभिक चरण में संक्रमण से निपटने के लिए आवश्यक उपाय करें।
सभी टीके सही समय पर लगवाएं
टीके शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने में मदद करते हैं और संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। टीकाकरण शिशु के डॉक्टरी चेक-अप का जरुरी हिस्सा होता है।
हमारी टीकाकरण सारणी में जानें कि आपके शिशु को कब-कब टीके लगने हैं।
यदि शिशु का टीकाकरण देरी से चल रहा है या कोई टीका चूक गया है, तो डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें।
बदलते तापमान पर विशेष ध्यान दें
जहां तक संभव हो शिशु को अचानक से सर्द से गर्म या गर्म से सर्द तापमान में न लेकर जाएं।
शिशु, विशेषकर नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान अच्छे ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाते और उन्हें बहुत जल्दी सर्दी या गर्मी लग सकती है।
ध्यान रखें कि चाहे कोई भी मौसम हो, जरुरी है कि आप सोते समय शिशु के शरीर का तापमान न बढ़ने दें। शिशु को अत्याधिक गर्मी लगना अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम
(सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम -एसआईडीएस) या कॉट डेथ से जोड़ा जाता है। शिशु को सुलाते समय हमेशा इन सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखें।
मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं
बदलते मौसम में दिन भर तापमान में उतार-चढ़ाव रह सकता है। हो सकता है दिन की शुरुआत में बहुत गर्मी या ठंड हो और बाद में ठंडक या गर्माहट हो जाए।
बेहतर है कि शिशु को परत दर परत कपड़े पहनाएं ताकि तापमान के अनुसार आप उसके कपड़े उतार सकें या पहना सकें, इससे वह दिन भर आराम से रह सकेगा।
गंदे क्षेत्रों से बचें
यदि आप उनसे बच सकते हैं तो उन क्षेत्रों में न जाएँ जहाँ बहुत अधिक पोखर और कीचड़ हैं। अपने घर के करीब या अपने घर के आसपास ही टहलें। घनी झाड़ियों या उगी
घास वाले क्षेत्रों से बचें क्योंकि वहां मच्छरों के काटने और कभी-कभी सांप या बिच्छू के काटने का भी खतरा होता है।
भीड़-भाड़ से दूर रहें
किसी भी स्थान पर जहां बहुत अधिक लोग हों, वहां संक्रमण फैलाने वाले लोगों के मौजूद रहने और इसके और अधिक फैलने की संभावना अधिक होती है। अपनी और अपने बच्चे की भलाई के लिए इनसे दूर रहें।
चूंकि जुकाम और फ्लू जैसे वायरल इनफेक्शन बदलते मौसम के दौरान सबसे ज्यादा फैलते हैं, इसलिए कीटाणुओं को दूर रखने के लिए आपको अतिरिक्त एहतियात बरतनी चाहिए।
बंद या भीड़ भरे इलाकों में ज्यादा न जाएं। इनडोर प्लेग्राउंड, मॉल, सिनेमा, म्यूजियम और अन्य ऐसी जगहों पर जहां ज्यादा लोग इकट्ठे होते हों, वहां न जाएं। चारों तरफ से बंद जगहों पर कीटाणु ज्यादा आसानी से फैलते हैं।
मच्छर से बचाव जरूरी है
शाम होते ही मच्छर बच्चों को जल्दी काट सकते हैं। अपने नवजात शिशु के लिए पूरी बाजू की शर्ट और पैंट पहनें और उन्हें दूर रखने के लिए मच्छर क्रीम का भी उपयोग करें।
पर्यावरण प्रेम को बढ़ावा दें
नवजात शिशु को पर्यावरण प्रेम का महत्व समझाएं। उन्हें सुरक्षित रूप से प्लास्टिक और कचरे का नियमित तौर पर निपटान करना सिखाएं। उन्हें वातावरण संरक्षण के बारे में सचेत बनाएं,
जैसे कि पानी की बचत करना, पेड़-पौधों को रक्षा करना, और वायु प्रदूषण कम करना।
मौसमी एलर्जी को पहचाने और जरुरी कदम उठाएं
कुछ बच्चों को एलर्जी होने की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि ये उनके परिवार में आनुवांशिक होती हैं।
मौसमी एलर्जियां जैसे कि एलर्जिक राइनाइटिस या हेफीवर आदि हवा में मौजूद तत्वों जैसे कि पराग कणों या फफूंद आदि के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया होती है। इस तरह की एलर्जी साल के उस समय शुरु होती है जब कुछ विशेष पेड़, घास या जंगली घास खिलती हैं। या फिर फफूंद अपने बीजाणु हवा में जारी करती है।
यदि आपके शिशु को श्वसन संबंधी समस्याओं, साइनसाइटिस और त्वचा की एलर्जियों का इतिहास रहा है, तो स्मॉग प्रदूषण के समय उसे ये समस्याओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। यहां जानें कि हवा की गुणवत्ता खराब होने की स्थिति में शिशु का ध्यान कैसे रखा जाए।
जब आपको पता चल जाएगा कि आपके बच्चे को किस चीज से एलर्जी है, तो उसे जितना हो सके उस एलर्जन से दूर रखें। ऐसा कर पाना हमेशा आसान नहीं होता, मगर आप कुछ कदम उठा सकती हैं। एलर्जी पैदा करने वाले सबसे आम तत्वों से बचाव के बारे में इस लेख में पढ़ें।
पोर्टेबल सैनिटाइज़र का विकल्प चुनें
चूँकि जब आप बाहर होते हैं तो आपको हमेशा साफ पानी नहीं मिल पाता है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप अपने साथ सैनिटाइज़र की एक छोटी बोतल रखें और नवजात शिशु को संभालते समय अपने हाथों को साफ करने के लिए इसका उपयोग करें।
प्रकृति के साथ संवाद को प्रोत्साहित करें
बारिश के मौसम में नवजात शिशु को प्रकृति के साथ संवाद करने का अवसर दें। उन्हें वृक्षों, पौधों, पक्षियों और जीव-जंतुओं के बारे में जानने की प्रेरणा दें। आप उन्हें वाणिज्यिक
बगीचे, जंगल या पानी के निकट जाने के लिए ले जा सकते हैं। इससे उनके भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास को संवारने में मदद मिलेगी।
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मानसून के दौरान आपको अपने बच्चे को कितनी बार नहलाना चाहिए?
चूँकि बच्चा प्राथमिक रूप से घर के अंदर रहता है, इसलिए उसे दैनिक स्नान की आवश्यकता नहीं होती है। सप्ताह में दो से तीन बार और विशेष रूप से नमी वाले समय में स्नान कराने से आपके
बच्चे को गर्मी से भी राहत मिल सकती है। यदि आपका बच्चा बाहर गया है, तो उसे अच्छे से गर्म पानी से नहलाएं।
मानसून सचमुच बच्चों और नवजात शिशुओं के चेहरे पर मुस्कान ला देता है।
बारिश में खेलना और कागज की नाव चलाना बचपन की सबसे यादें हैं।
मानसून में नवजात शिशु की देखभाल के सही टिप्स अपनाकर, छोटे बच्चे मौसम का
भी भरपूर लाभ उठा सकते हैं और आप उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में भी आश्वस्त हो सकते हैं।